इस वर्ष रक्षाबंधन पर सिर्फ दो घंटे ही शुभ मुहूर्त, जानिए

सात अगस्त को मात्र दो घंटे ही भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त है। जो सुबह 11 बजकर पांच मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर एक बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
: खबर वाली ब्लॉग : रक्षाबंधन के पर्व पर इस साल ग्रहण का सूतक रहेगा। ग्रहण की साया के साथ इस वर्ष भद्रा भी राखी बांधने में बाधा उत्पन्न करेगी। इस कारण सात अगस्त को मात्र दो घंटे ही भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त है। जो सुबह 11 बजकर पांच मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर एक बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
 रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यानी छह अगस्त की रात्रि को साढ़े दस बजे से भद्रा का प्रारंभ होगा। जिसका समापन सात अगस्त को सुबह 11 बजकर पांच मिनट पर होगा। भद्रा में विशेष रूप से दो कार्य वर्जित माने जाते हैं। पहला श्रावणी (रक्षाबंधन) और दूसरा फाल्गुनी (होलिका दहन)। जबकि ग्रहण का प्रारंभ आठ अगस्त को रात में दस बजकर 53 मिनट से होगा और मोक्ष रात्रि 12 बजकर 48 मिनट पर होगा। 
वहीं ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले आरंभ हो जाता है। आइआइटी रुड़की परिसर स्थित श्री सरस्वती मंदिर के पंडित राकेश कुमार शुक्ल के अनुसार लभगग 27 वर्षों के बाद रक्षाबंधन पर इस प्रकार का संयोग पड़ रहा है। इससे पूर्व 1990 में श्रावण पूर्णिमा के दिन सोमवार और श्रावण नक्षत्र में चंद्र ग्रहण लगा था। 
 इसी प्रकार इस वर्ष भी उसी नक्षत्र और वार में ग्रहण घटित हो रहा है। विनायक कुंज स्थित श्री कृष्ण वैदिक ज्योतिष परामर्श केंद्र एवं भागवत ज्ञान यज्ञ उद्गम ट्रस्ट के संस्थापक पंडित लोकेश शास्त्री के अनुसार शुभ मुहूर्त में ही बहन और भाई के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाना अधिक फलदायी होगा। 
 कई कथाओं में रक्षाबंधन का वर्णन 
स्कन्द पुराण, श्रीमद् भागवत कथा, वामनावतार की कथा आदि के प्रसंग में रक्षाबंधन का वर्णन मिलता है। जब मां लक्ष्मी भगवान विष्णु से अलग रहकर परेशान हुई तो नारद जी ने उन्हें राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भाई बनाने की सलाह दी। मां लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर अपने पति भगवान विष्णु को प्राप्त कर लिया। 
 महाभारत युद्ध के दौरान शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण की अंगुली में चोट लग गई थी। उस समय द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर एक टुकड़ा भगवान कृष्ण की अंगुली में बांध दिया था। इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी चीरहरण के दौरान उनकी लाज बचाकर एक भाई का फर्ज निभाया था। 
 विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत
भद्रा को लेकर विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। भद्रा का निवास अलग-अलग राशियों पर तीनों लोकों में होता है। इस बार पूर्णिमा तिथि पर मकर राशि की भद्रा होने से रक्षाबंधन में बाधा नहीं होगी क्योंकि मकर राशि की भद्रा पाताल लोक में होती है जो शुभ मानी गई है। वैसे इस विषय में विद्वान एक मत नहीं हैं। कुछ का मानना है कि रक्षाबंधन में तीनों लोकों की भद्रा सर्वथा त्याज्य होती है। 

इस वर्ष पूर्णिमा के दिन ग्रहण मेष, सिंह वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए शुभ और वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए अशुभ रहेगा। ग्रहण सूतक और ग्रहण काल में भोजन, शयन, व्यर्थ बोलना आदि वर्जित माना जाता है। जप करना शुभ होता है। जबकि ग्रहण की समाप्ति के समय स्नान और दान करना शुभ माना जाता है। 

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